जयपुर, 13 अप्रैल | दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में मासिक सत्संग समागम का आयोजन बड़े ही श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में शहर सहित दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में दिव्य गुरु आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुश्री लोकेशा भारती ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को भगवान हनुमान के दिव्य चरित्र के विषय में विस्तारपूर्वक अवगत कराया। उन्होंने बताया कि हनुमान जी केवल अपार शक्ति और पराक्रम के प्रतीक ही नहीं, बल्कि वे भक्ति, समर्पण, सेवा और विनम्रता के आदर्श स्वरूप हैं।
उन्होंने बताया कि समुद्र लांघने से पूर्व जामवंत द्वारा हनुमान को उनकी शक्तियों का स्मरण कराया गया, जो यह सिखाता है कि मनुष्य को अपनी छिपी हुई क्षमता को पहचानना चाहिए। मार्ग में सुरसा राक्षसी द्वारा ली गई परीक्षा को हनुमान जी ने अपनी बुद्धिमत्ता से पार किया, वहीं सिंहिका राक्षसी का अंत कर उन्होंने यह संदेश दिया कि नकारात्मक शक्तियों पर विजय संभव है। लंका में प्रवेश के समय लंकिनी को पराजित कर हनुमान ने अपने लक्ष्य के प्रति अटूट संकल्प का परिचय दिया। तत्पश्चात अशोक वाटिका में माता सीता जी को प्रभु श्रीराम की अंगूठी देकर उन्हें आश्वस्त किया और उनका संदेश सुनाया, जिससे उनके हृदय में आशा एवं विश्वास का संचार हुआ। अपने प्रवचनों में यह भी कहा कि हनुमान का सम्पूर्ण जीवन हमें सिखाता है कि यदि हमारे भीतर सच्ची भक्ति, गुरु के प्रति श्रद्धा और सेवा का भाव हो, तो जीवन की कोई भी बाधा हमें हमारे लक्ष्य से विचलित नहीं कर सकती। यह मासिक सत्संग समागम न केवल आध्यात्मिक जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि श्रद्धालुओं के जीवन में सकारात्मकता, शांति और नई प्रेरणा का संचार भी कर गया
