दो दिवसीय वार्षिक उत्सव में हुआ कलशाभिषेक
जयपुर, 13 जून । इंजीनियर्स कॉलोनी, मान्यावास के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार से दो दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ आचार्य आदित्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य जिनेश भैया के निर्देशन में भगवान शांतिनाथ स्वामी के कलशाभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। कार्यक्रम में ध्वजारोहण के पश्चात नवग्रह विधान पूजन आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने अष्ट द्रव्यों के साथ नवग्रहों की शांति, सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हुए गाजे-बाजे, जयघोष एवं मंत्रोच्चारण के मध्य मंडल पर अर्घ्य समर्पित किए।
अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा एकता संघ के अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि शनिवार को सायंकाल संगीतमय भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालु अपने-अपने घरों से सुसज्जित आरती की थालियां लेकर पहुंचे और भगवान शांतिनाथ स्वामी, चौबीस तीर्थंकर भगवान तथा आचार्य आदित्य सागर महाराज की भक्ति भावपूर्वक महामंगल आरती की। महाआरती के उपरांत 48 दीपों के साथ भक्तामर स्तोत्र दीप अर्चना का आयोजन किया गया।
मंदिर समिति सदस्य सीए मनीष छाबड़ा और अनिल बोहरा ने बताया कि वार्षिक उत्सव का मुख्य आयोजन रविवार, 14 जून को भगवान शांतिनाथ स्वामी का पंचामृत कलशाभिषेक (जल, चंदन, केसर, दूध, दही आदि) एवं शांतिधारा कर प्रारंभ होगा। इसके पश्चात मंगल ध्वनियों एवं साजों-बाजों के मध्य शांतिनाथ महामंडल विधान का मंत्रोच्चारण एवं अष्ट द्रव्य पूजन आयोजित किया जाएगा। विधान पूजन के दौरान भगवान शांतिनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर्व के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं द्वारा मंत्रोच्चार के साथ निर्वाण लड्डू समर्पित किया जाएंगे। कार्यक्रम के समापन पर समाज की सामूहिक गोठ का आयोजन भी होगा।
प्राणी का धर्म कर्तव्यनिष्ठाता पर आधारित होता है, जहां सम्मान वही महान — आचार्य आदित्य सागर महाराज
विधान पूजन के दौरान अपने मंगल आशीर्वचनों में आचार्य आदित्य सागर महाराज ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक धर्म केवल पूजा-पाठ या बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहना है। जो व्यक्ति अपने परिवार, समाज, राष्ट्र और आत्मकल्याण के प्रति जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करता है, वही सच्चे अर्थों में धार्मिक कहलाता है। आचार्य श्री ने कहा कि सम्मान मांगने से नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठ जीवन जीने से प्राप्त होता है। जिस व्यक्ति के आचरण में सत्य, विनम्रता, सेवा, करुणा और उत्तरदायित्व होता है, समाज स्वयं उसका सम्मान करता है। पद, प्रतिष्ठा और धन से महानता नहीं आती, बल्कि चरित्र और कर्तव्यपालन ही व्यक्ति को महान बनाते हैं।