जयपुर, 6 अप्रैल । 1 अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी चालू हो गयी है | हर वर्ष शिक्षा विभाग यह आदेश निकलता है कोई भी निजी स्कूल परिजनों को किताब, ड्रेस, बेल्ट, जूते टाई आदि दुकान विशेष या वेंडर से खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है लेकिन हकीकत इसके बिलकुल उलट है | यह निजी स्कूलों में बढ़ती मनमानी और अभिभावकों का आर्थिक शोषण गंभीर चिंता का विषय है। निजी स्कूल जहां फीस के नाम पर अभिभावकों से अत्यधिक वसूली की जाती थी, वहीं अब किताब, कॉपी, ड्रेस एवं स्टेशनरी के नाम पर भी संगठित रूप से लूट का खेल जारी है।
सरकार द्वारा निजी स्कूलों को किताब-कॉपी खरीदने के लिए कम से कम 5 वेंडर की सूची देने का प्रावधान किया गया है | साथ ही अभी हाल ही में 1 अप्रैल को शिक्षा निदेशक सीताराम जाट से समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर ब्लॉक स्तर पर 3 सदस्यीय कमेटी का गठन कर निजी स्कूलों की जांच करने तक के आदेश दिए हुए है ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके। वही हकीकत स्कूल अपने फिक्स वेंडरों को ही सूची में शामिल करते हैं | सभी वेंडरों पर एक जैसी महंगी किताबें उपलब्ध रहती हैं अभिभावकों के पास वास्तविक विकल्प नहीं बचता कमीशन आधारित सिस्टम पहले की तरह जारी है | जहा NCERT किताबें: ₹300 – ₹1500 की होती है वही निजी स्कूलों में किताबे ₹4000 – ₹8000 तक मिल रही है |

संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि प्रदेशभर में निजी स्कूलों द्वारा सुनियोजित तरीके से किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। सरकार की 5 वेंडर नीति पूरी तरह विफल साबित हो रही है, क्योंकि सभी वेंडर स्कूलों के प्रभाव में काम करते हैं। जब तक सरकार सख्त नियम बनाकर NCERT किताबों को अनिवार्य नहीं करती और ओपन मार्केट व्यवस्था लागू नहीं करती, तब तक यह लूट बंद होना संभव नहीं है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
