जयपुर, 2 अप्रैल। राजस्थान सरकार कर्मचारी एवं पेंशनर्स को दी जाने वाली चिकित्सा सुविधा आरजीएचएस को इंश्योरेंस कंपनी को देने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत तथा राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ ने इसका कड़ा विरोध किया है। कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने मांग की है कि किसी भी इंश्योरेंस कंपनी से सरकार बड़ी होती है तथा जब इंश्योरेंस कंपनी अपना मुनाफा कमा कर आरजीएचएस को चला सकती है तो फिर सरकार क्यों नहीं ? सरकार अपनी व्यवस्थागत खामियों को दूर करने की बजाए निजीकरण करने जा रही है। सरकार खुलासा करे कि इंश्योरेंस कंपनियों की प्रक्रिया क्या रहेगी । वह वर्तमान अन्य कंपनियों की तरह पैकेज के नाम पर सुविधाओं में कोई कटौती तो नहीं करेगी । क्या भर्ती होने के लिए पेशेंट को घंटों अनुमति का इंतजार करना पड़ेगा। यदि वर्तमान में दी जा रही सुविधा सी बुरी हालत होते हैं तो कर्मचारी संगठन उसका विरोध करेंगे ।
राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह यादव तथा प्रदेश महामंत्री देवेंद्र सिंह नरूका ने कहा की वर्तमान में भी आरजीएचएस पूर्णतया निशुल्क दवा योजना नहीं रह गई है क्योंकि समस्त कर्मचारियों द्वारा आवश्यक रूप से प्रतिमाह अपने वेतन से आरजीएचएस की कटौती करवाने के बावजूद आउटडोर हो या इंडोर, अनेक दवाइयां तथा विभिन्न सर्जिकल आइटम अनुमोदित सूची में नहीं होने के कारण पैसे देने पड़ते हैं। अधिकांश गंभीर बीमारियों में भी पैकेज सिस्टम लागू कर दिया गया है । अब आरजीएचएस को इंश्योरेंस कंपनियों को दिए जाने पर यह संभावना और बढ़ेगी कि वह कंपनियां अपना लाभ बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की सुविधाओं में कटौती करेगी तथा कर्मचारियों को और अधिक खर्च उठाना पड़ेगा।
