जयपुर, 19 । संयुक्त अभिभावक संघ के तत्वाधान में शिक्षा संकुल पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में बड़ी संख्या में आरटीई से जुड़े पीड़ित अभिभावकों ने भाग लिया। बैठक में शिक्षा विभाग की लापरवाही और निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। अभिभावकों ने बताया कि आरटीई के तहत सत्र 2026-27 के दाखिलों की प्रक्रिया अभी पूर्ण रूप से निर्धारित भी नहीं हुई है, इसके बावजूद कई निजी स्कूलों द्वारा चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों पर अवैध रूप से शुल्क जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। यह स्थिति नियमों के विपरीत है और अभिभावकों का आर्थिक एवं मानसिक शोषण है।
बैठक में संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल एवं प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने अभिभावकों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा सभी उपस्थित अभिभावकों की लिखित शिकायत एकत्रित कीं। इस दौरान श्रीमती आरती वर्मा, एडवोकेट संतोष, देवांश कुमावत, एडवोकेट जयपाल चौधरी, धर्मेंद्र मीणा, मुकेश कुमार (मांझी रेनवाल), मनोज पाटनी, इमरान कुरैशी, श्रीमती अर्पणा सिंह, विकास चंदेलिया, सुरेश लील, मनु भास्कर, मोनू शर्मा सहित अन्य अभिभावक उपस्थित रहे।
संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने आरोप लगाया कि विभाग की उदासीनता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लाखों चयनित विद्यार्थियों का भविष्य एक बार फिर संकट में नजर आ रहा है, जिससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि लगातार दूसरे वर्ष भी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की योजना और अभिभावकों को ठोकरें खाने जैसे कार्य किए जा रहे है।
वही बैठक के दौरान पीड़ित अभिभावकों ने आपने अनुभव साझा करते हुए मुकेश मुंडोतियां ने बताया कि उनकी पुत्री मायरा का चयन मांझी रेनवाल स्थित एम. विंग्स एकेडमी सी.सै. स्कूल में हुआ है। दस्तावेज जमा करवाने के दौरान स्कूल प्रशासन ने पूरे वर्ष की फीस जमा कराने की मांग की और कहा कि फीस नहीं देने पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। आरती धाबी ने बताया कि उनकी पुत्री अनाया का चयन महारानी फार्म, गायत्री नगर स्थित सीडलिंग मॉडर्न हाई स्कूल में आठवें स्थान पर हुआ, लेकिन स्कूल प्रशासन ने दस्तावेज लेने से ही इनकार कर दिया और केवल पहले पांच बच्चों को प्रवेश देने की बात कही, जो नियमों के विपरीत है। मोनू मेहरा ने बताया कि* उनके पुत्र का चयन चांदी की टकसाल स्थित शिव पब्लिक स्कूल में हुआ है, लेकिन वहां भी दस्तावेज लेने के बाद एक वर्ष की फीस मांगी जा रही है। ऐसे मामले रोज़ाना सामने आ रहे है लेकिन निजी स्कूलों के खिलाफ अधिकारी कोई ठोस कार्यवाही करने हिचक रहे है जिसका कोई ठोस कारण नज़र नहीं आ रहा है |
