जयपुर, 19 मार्च । राजस्थान सरकार के मंत्रियों और आला अफसरों को सुरक्षित मंजिल तक पहुँचाने वाले स्टेट मोटर गैराज और अन्य विभागों के बेड़े में आज करोड़ों की लग्जरी कारें तो शामिल हो गई हैं, लेकिन इन गाड़ियों के ‘पहिए’ थामने वाले सारथियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जहाँ एक ओर गाड़ियों की चमक और बजट 2 से 3 गुना तक बढ़ गया है, वहीं इन चालकों का भविष्य पदोन्नति और वेतनमान के अभाव में धुंधलाता जा रहा है।सरकार ने मूवमेंट के लिए 40-50 लाख रुपये तक की फॉर्च्यूनर, इनोवा जैसी महंगी कारें खरीदी हैं | वही चालक आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
विभागों में पदोन्नति के अवसर शून्य हैं और 50 से 55 वर्ष की आयु पार कर चुके चालक भी आज स्टीयरिंग थामने को मजबूर हैं। ढलती उम्र में आंखों की कम होती रोशनी के बावजूद वे हाई-प्रोफाइल ड्यूटी कर रहे हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा सवाल है। 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने वाले इन कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारी के अनुसार उचित वेतन, पदोन्नती, हार्ड ड्यूटी, मेष भत्ता और बीमा सुरक्षा भी मयस्सर नहीं है।
