Friday, March 13, 2026
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जलदाय कर्मचारियों के विरोध के आगे झुका प्रशासन निजीकरण नहीं करने का लिखित आश्वासन


जयपुर, 13 मार्च। जलदाय विभाग के निजीकरण के विरोध में आज जल भवन जयपुर में प्रान्तीय नल मजदूर यूनियन (इंटक) के प्रदेशाध्यक्ष संजय सिंह शेखावत के नेतृत्व में प्रदेश भर से आए हजारो जलदाय कर्मचारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार और विभागीय अधिकारियों के सामने अपनी एकजुटता की ताकत दिखाई। प्रदेशाध्यक्ष संजय सिंह शेखावत व कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बाबूलाल शर्मा व जिला अध्यक्ष तारा चन्द सैनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जलदाय विभाग कर्मचारियों की जीवन रेखा है और इसे किसी भी हाल में निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।

कर्मचारियों की एकजुटता और प्रबल विरोध के बाद कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास कर रहे थे जिसकी भनक मुख्य अभियंता मुख्यालय देवराज सोलंकी को लगी तभी मुख्य अभियंता सोलंकी धरने स्थल पर पहुँचे और कर्मचारियों संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा व जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी कर्मचारियों के प्रति सकारात्मक रुक है और कर्मचारियों का अहित नहीं होने देंगे इसके साथ ही इंटक को लिखित रूप में पत्र देकर आश्वस्त किया कि विभाग में किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं किया जाएगा।साथ ही तकनीकी कर्मचारियों की नई भर्ती करने का आश्वासन दिया। तब जाकर  कर्मचारी शांत हुए इस मौके पर राजस्थान इंटक के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश राज श्रीमाली सरंक्षक जगदीश प्रसाद शर्मा व रामाशंकर गुर्जर प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र सिंह सोलंकी वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह शेखावत कर्मचारी नेता राजेश पारीक,महेंद्र शर्मा,बाबूलाल यादव उपस्थित रहे ।

प्रान्तीय नल मजदूर यूनियन (इंटक) के पदाधिकारियों ने कहा कि यह जीत जलदाय कर्मचारियों की एकता, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की जीत है। यदि भविष्य में फिर से विभाग को निजीकरण की ओर ले जाने का प्रयास किया गया तो कर्मचारी इससे भी बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि जलदाय विभाग केवल एक विभाग नहीं बल्कि प्रदेश की जनता को जीवन देने वाली व्यवस्था है, और इसे बचाने के लिए कर्मचारी हर संघर्ष के लिए तैयार हैं। अंत में यूनियन ने सभी कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी एकता और जोश ने यह साबित कर दिया है कि जब कर्मचारी एकजुट होते हैं तो कोई भी फैसला बदल सकता है।

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