कोटा, 15 मार्च | दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा व्यास साध्वी पद्महस्ता भारती ने प्रथम दिवस श्रीमद् भागवत कथा का महात्म्य सुनाया। कथा प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं से वैदिक काल की तरह पुनर्जागरण होने का आह्वान किया। समृद्धशाली भारतीय संस्कृति से परिचित करवा कर सच्चे अर्थों में भारतीय बनने की प्रेरणा दी गई। स्कन्द पुराण में भगवान् शिव द्वारा बताए आत्म-तीर्थ से भी अवगत करवाया गया। साध्वी बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने यशोदा मैया को अपने मुख में ब्रह्मांड दिखाकर यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे के वैदिक सिद्धांत को समझाया। विभिन्न शास्त्र ग्रंथों से उदाहरण देकर इस बात की पुष्टि भी की गई—जैसे फूल में सुगंध, तिल में तेल, लकड़ी में अग्नि, ईख में गुड़ समाया है, ऐसे ही इस मानव देह के भीतर परमात्मा और उसकी सृष्टि विद्यमान है।
लेकिन जैसे माइक्रोस्कोप के द्वारा सूक्ष्म जीवाणुओं को देखा जाता है, ऐसे ही उस परमात्मा को दिव्य दृष्टि के द्वारा देखा जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे एक छोटी सी माइक्रोचिप में हजारों गीगाबाइट data को इकट्ठा किया जाता है, ऐसे ही परमात्मा और उसका ऐश्वर्य हमारे इस शरीर में समाया है। आवश्यकता है तो बस अध्यात्म विज्ञानी सतगुरु के पास जाकर उसे decode करने की विधि जानने की। उन्होंने बताया कि लाखों लोगों ने परमात्मा के नाम रूपी आनंद अमृत का पान कर नशे को सदा के लिए अलविदा कह दिया। बोध प्रकल्प के माध्यम से आज हर आयु वर्ग के लोगों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता के साथ-साथ नशे से मुक्ति भी प्रदान की जाती है।
