जयपुर, 20 दिसम्बर | दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) की और से आयोजित पाँच दिवसीय शिव आराधना का शुभारंभ आज शुरू हुआ । पहले दिन की कथा में साध्वी लोकेशा भारती ने शिव महात्म्य, चंचुला की कथा एवं नारद मोह प्रसंग के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि भगवान शिव चेतना, वैराग्य और आत्मसंयम के प्रतीक हैं ना कि नशे के | उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग शिव की छवि को विकृत कर उनके नाम की आड़ में नशे को बढ़ावा दे रहे हैं जिससे विशेषकर युवा पतन की ओर अग्रसर हो रहे हैं।उन्होंने बताया कि बोध नशा‑मुक्ति प्रकल्प का उद्देश्य समाज को हर प्रकार के नशे से मुक्त कर सही ज्ञान और जागरूकता प्रदान करना है। यह प्रकल्प आत्मबोध के माध्यम से व्यक्ति को नशे की लत से बाहर निकालकर सकारात्मक, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर करता है।यह प्रकल्प सरकार के चल रहे नशा मुक्ति अभियान में योगदान दे रहा है
कथा में यह संदेश भी दिया गया कि सच्ची शिव आराधना नशे में डूबने से नहीं, बल्कि विवेक, सेवा और संयम को अपनाने से होती है। साध्वी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग भगवान शिव के नाम की आड़ लेकर नशा करते हैं, वे शिव की वास्तविक छवि को विकृत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने कभी भांग अथवा किसी भी प्रकार के नशे पान नहीं किया । शिव तत्व आत्मसंयम, जागरूकता और उच्च चेतना का प्रतीक है, न कि नशे का। समाज को जागृत करने की आवश्यकता है ताकि लोग शिव के वास्तविक स्वरूप को समझें और भ्रमित परंपराओं से बाहर निकलें। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा, भजन के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। आगामी दिनों में शिव तत्व, नशा‑मुक्त समाज, आत्मबोध एवं जीवन मूल्यों पर आधारित प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।
