जयपुर, 7 नवम्बर | यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन नई दिल्ली द्वारा जनवरी में देश के कॉलेज और विश्वविद्यालयों के लिए जारी समता का संवर्धन विनियम 2026 पर सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा पुनर्समीक्षा के लिए कमेटी गठन और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होने के जवाब के बाद विप्र महासभा के संस्थापक सुनील उदेईया ने कहा है कि कोर्ट और सरकार द्वारा अंतिम निर्णय तक हम सजग रह कर प्रतीक्षा करेंगे । उदेईया ने कहा कि जनवरी में ही आदेश जारी होने के बाद हमने आदेशों की होली जला कर विरोध शुरू किया जो बाद में बड़े प्रदर्शन और धरनों तक चला तथा सवर्ण समाज ने खुल कर विरोध किया । सवर्ण समाज के कड़े विरोध के बाद सरकार ने गलती मानी और तत्कालीन यूजीसी सचिव व अध्यक्ष को हटा दिया था तथा तत्कालीन मंत्री को भी पद छोड़ना पड़ा ।
सरकार और आरएसएस के कई ज़िम्मेदार पदाधिकारियों द्वारा भी सवर्ण समाज को आश्वस्त किया कि यह आदेश लागू नहीं होने देंगे । अब मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में है और सरकार ने भी दो बार इस पर पुनर्विचार के लिए आश्वस्त किया है । यूजीसी कमेटी के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह और सदस्य सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने भी स्पष्ट कहा है कि यह आदेश उनकी कमेटी से अनुमोदित नहीं हुआ है ऐसे में उस यूजीसी सचिव द्वारा जारी आदेश स्वतः ही अवैधानिक हो गया है । अत: यूजीसी के आदेश पर अब हमारा स्पष्ट रुख़ है कि हमको उच्चतम न्यायालय पर पूर्ण विश्वास है और कोर्ट और सरकार द्वारा मिल कर एक बार अंतिम रूप से तय करने के पश्चात अगला कदम उठायेंगे ।
