जयपुर, 29 अक्टूबर। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में आयोजित छह दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम कौमार-संभव 2026 के चौथे दिन कौमार (बाल) पंचकर्म की मानकीकृत उपचार प्रक्रियाओं से संबंधित प्रोटोकॉल का विमोचन किया गया। संस्थान के कुलपति प्रो.संजीव शर्मा ने कौमार पंचकर्म प्रोटोकॉल का मानकीकरण (Standardization of Kaumara Panchakarma Protocols) शीर्षक से तैयार इस दस्तावेज का विमोचन किया। इसका उद्देश्य बाल चिकित्सा में आयुर्वेदिक पंचकर्म प्रक्रियाओं को व्यवस्थित, एकरूप और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित करना है।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) गोवा के कौमारभृत्य विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) निशा कुमारी ओझा, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के कौमारभृत्य विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राकेश कुमार नागर तथा आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (आईटीआरए), जामनगर के कौमारभृत्य विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वीरेंद्र कुमार कोरी उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभाग के संकाय सदस्यों के साथ देश के विभिन्न राज्यों एवं संस्थानों से आए 30 प्रतिभागियों ने भी सहभागिता की।
बाल चिकित्सा में उपचार प्रक्रियाओं के मानकीकरण पर जोर
संस्थान के कौमारभृत्य विभाग द्वारा विकसित इन प्रोटोकॉल में शिशुओं, बच्चों और किशोरों की आयु तथा शारीरिक एवं विकासात्मक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पंचकर्म प्रक्रियाओं के व्यवस्थित निर्धारण पर जोर दिया गया है। इनमें रोगी का चयन, उपचार से पूर्व की तैयारी, चिकित्सा प्रक्रिया, औषधियों की मात्रा, उपचार की अवधि, आयु के अनुसार आवश्यक बदलाव, सुरक्षा संबंधी सावधानियां, निषेध, उपचार के दौरान निगरानी तथा चिकित्सकीय परिणामों के मूल्यांकन जैसे प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया है। साथ ही, इनके माध्यम से पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में प्रयास किया गया है।
बाल पंचकर्म में सुरक्षा और अनुसंधान पर विशेष ध्यान
प्रोटोकॉल में बाल रोगियों की सुरक्षा, आयु के अनुरूप चिकित्सा प्रक्रियाओं के चयन, व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार उपचार तथा निरंतर चिकित्सकीय निगरानी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उपचार के परिणामों के व्यवस्थित मूल्यांकन पर भी जोर दिया गया है, जिससे भविष्य में इन प्रक्रियाओं के वैज्ञानिक अध्ययन और प्रमाणीकरण की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जा सके। यह पहल बाल आयुर्वेद चिकित्सा में शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे विभिन्न संस्थानों के बीच ज्ञान एवं अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने और कौमार पंचकर्म की चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के व्यवस्थित अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
