जयपुर, 17 अक्टूबर। नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर माँ भगवती की आराधना, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के उद्देश्य से शक्ति आराधना कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मणिमाला भारती ने सत्संग के माध्यम से माँ भगवती की महिमा, उनके दिव्य स्वरूप तथा ब्रह्मज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जागृति का संदेश दिया। माँ भगवती के भजनों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और पूरा वातावरण भक्तिरस एवं आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो गया।
साध्वी मणिमाला भारती ने नवरात्रि में पूजित माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों माँ शैलपुत्री, माँ ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा, माँ कूष्मांडा, माँ स्कंदमाता, माँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि, माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री की महिमा का वर्णन करते हुए उनके आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी संदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि माँ के प्रत्येक स्वरूप में श्रद्धा, तप, साहस, सृजन, मातृत्व, धर्म की रक्षा, निर्भयता, पवित्रता और सिद्धि जैसे दिव्य गुणों का संदेश निहित है। माँ के ये स्वरूप मनुष्य को जीवन की चुनौतियों का सामना करने, बुराइयों से दूर रहने और सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने माँ भगवती के अष्टभुजी स्वरूप की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए बताया कि देवी के अनेक हाथ उनकी असीम शक्ति, सामर्थ्य और धर्म की रक्षा करने की क्षमता के प्रतीक हैं। जिस परम शक्ति से संपूर्ण सृष्टि का संचालन हो रहा है, वह किसी एक स्थान या प्रतीक तक सीमित नहीं, बल्कि सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है। वही दिव्य सत्ता प्रत्येक मनुष्य के भीतर भी मौजूद है, किंतु अज्ञान के कारण मनुष्य अपनी आंतरिक दिव्यता को पहचान नहीं पाता।
