जयपुर, 15 अक्टूबर | मंदिर श्री गीता गायत्री जी पंडित राजकुमार चतुर्वेदी के सानिध्य कन्या बटुक पूजन महोत्सव पंचमी तिथि पर संपन्न हुआ | मंदिर प्रवक्ता नीतीश चैतन्य चतुर्वेदी ने बताया प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 1100 से अधिक कन्या और बटुकों का पूजन किया गया संत समाज अध्यक्ष सियाराम दास जी महाराज, घाट बालाजी सुदर्शन आचार्य , नहर के गणेश से मानव, जय कुमार ने नवरात्र के माता के नव रूपों की आरती उतार कर नव रूपों में संसार बस यह कहकर सभी कन्या बटुकों को तिलक लगाकर उपहार देकर विदा किया |
कन्या और बटुक पूजन की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है माता के जब दर्शन करने जाते हैं तो जब तक भैरव जी का दर्शन नहीं किया जाए तभी तक माता के दर्शन पूरे नहीं होते चाहे वैष्णो देवी में जाओ तो माता के दर्शन के उपरांत भैरु जी के दर्शन करने पड़ते हैं | आमेर शिला देवी में भी माता के बाद दर्शन किए जाते हैं इस परंपरा का निर्वाह करते हुए मंदिर श्री गीता गायत्री जी में प्रतिवर्ष कन्याओं के साथ-साथ बटुकों का पूजन भी किया जाता है | कन्या और बटुक यह दोनों ही हमारे जीवन का आधार है शिव और शक्ति शक्ति और शिव इन दोनों से ही जीवन बना है और शिव शक्ति की उपासना के नवरात्र हैं और नवरात्रों पर बटुक पूजन कन्या और बटुक पूजन हमारी संस्कृति का आधार है |
नवरात्रों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की शक्ति स्वरूप में आराधना की जाती है। माता की पूजा-अर्चना के पश्चात कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है तथा उन्हें प्रसाद और भोजन कराया जाता है। इसी परंपरा के अंतर्गत बालकों को भी बटुक भैरव का स्वरूप मानकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस प्रकार भैरव जी के दर्शन के बिना माता के दर्शन अधूरे माने जाते हैं, उसी प्रकार कन्या एवं बटुक पूजन के माध्यम से माँ आदिशक्ति और भगवान शिव के भैरव स्वरूप की संयुक्त उपासना की जाती है।
