जयपुर, 3 अप्रैल। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में जयपुर स्थित हनुमान मंदिर, धुलेश्वर गार्डन, सी-स्कीम में आयोजित तीन दिवसीय हनुमान कथा के दूसरे दिन कथा व्यास साध्वी लोकेशा भारती ने हनुमान के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन किया। इसी क्रम में सुरसा और लंकिनी प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया गया कि जब हनुमान जी समुद्र पार कर लंका की ओर जा रहे थे, तब मार्ग में सुरसा ने उनकी परीक्षा ली। हनुमान जी ने अपनी बुद्धिमत्ता और विनम्रता से इस परीक्षा को पार किया। वहीं लंका के द्वार पर लंकिनी के साथ उनका सामना हुआ, जिसे परास्त कर उन्होंने लंका में प्रवेश किया। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीवन में आने वाली बाधाएँ और परीक्षाएँ साधक को रोकने के लिए नहीं, बल्कि उसकी योग्यता और श्रद्धा को परखने के लिए होती हैं। जो व्यक्ति धैर्य, बुद्धि और भक्ति के साथ आगे बढ़ता है, वह हर चुनौती को पार कर अपने लक्ष्य तक पहुँच सकता है। साथ ही हनुमान जी द्वारा विभीषण को भगवान श्रीराम का परिचय कराने का प्रसंग भी सुनाया गया, जिसमें उन्होंने विभीषण को यह विश्वास दिलाया कि श्रीराम भगवान नारायण के अवतार हैं और उन्हें प्रभु की शरण में आने के लिए प्रेरित किया। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्चा भक्त स्वयं तो ईश्वर से जुड़ता ही है, साथ ही दूसरों को भी प्रभु तक पहुंचाने का माध्यम बनता है।
कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन एवं आध्यात्मिक प्रवचनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण करते हुए आत्मिक शांति, संतोष एवं दिव्य आनंद की अनुभूति की। आयोजक राजेंद्र धाधीच ने बताया कि कथा का समापन 4 अप्रैल 2026 को होगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अंतिम दिवस पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पावन आयोजन का लाभ लेने का आग्रह किया।
