जयपुर 22 दिसम्बर | दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा आयोजित शिव आराधन कथा व्यास साध्वी लोकेशा भारती ने सती दहन प्रसंग एवं दक्ष प्रजापति के यज्ञ के माध्यम से अहंकार के विनाशकारी स्वरूप को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि दक्ष प्रजापति का अहंकार इतना प्रबल था कि उन्होंने स्वयं अपनी पुत्री सती एवं भगवान शिव का अपमान किया, और यही अहंकार अंततः यज्ञ विध्वंस एवं सर्वनाश का कारण बना। उन्होंने सती दहन प्रसंग की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि सती भगवान शिव की पत्नी होने के बावजूद शिव तत्व को पूर्ण रूप से पहचान नहीं सकीं, इसलिए वे शिव के वचनों पर पूर्ण विश्वास नहीं कर पाईं। यह प्रसंग आज के मानव जीवन का भी दर्पण है, जहाँ मनुष्य भगवान को तो मानता है, परंतु भगवान को जानता नहीं है। मान्यता और अनुभूति के इसी अंतर के कारण व्यक्ति का विश्वास बार-बार डगमगाता है। ईश्वर को जानने के लिए सामान्य दृष्टि नहीं, बल्कि दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है, और यह दिव्य दृष्टि केवल गुरु कृपा से प्राप्त होती है। गुरु ही शिष्य को आत्मबोध कराते हुए ईश्वर तत्व का साक्षात्कार कराते हैं। गुरु मार्गदर्शन के बिना शिव तत्व को समझना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि दक्ष का अहंकार और शिव का वैराग्य हमें यह सिखाता है कि जहाँ अहंकार होता है, वहाँ विनाश सुनिश्चित है, और जहाँ शिव तत्व—विनम्रता, त्याग एवं समर्पण—होता है, वहीं कल्याण होता है। शिव आराधना का वास्तविक उद्देश्य बाहरी पूजा नहीं, बल्कि भीतर छिपे अहंकार का विसर्जन कर चेतना का उत्थान करना है। इस दौरान नशा-मुक्त समाज की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया गया। साध्वी जी ने कहा कि आज मानव चेतना अनेक प्रकार के नशों—शारीरिक, मानसिक एवं वैचारिक—से ग्रस्त है। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का “बोध” नशा-मुक्ति प्रकल्प व्यक्ति को केवल बाहरी नशे से ही नहीं, बल्कि आंतरिक विकारों से भी मुक्त कर जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनाना चाहता है। कार्यक्रम में मोती लाल जी खरेरा पूर्व विधायक, राधा रानी, आनंद कुमार चौहारिआ, तारा चाँद जैन, अभिषेक रमन, राजू लाल, पदम् लाल जांगिड़ सहित अनेक लोग मौजूद रहे |
