जयपुर 21 दिसम्बर । दिव्य गुरु आशुतोष महाराज की परम दिव्य अनुकंपा से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय शिव आराधन के दुसरे दिन की कथा में साध्वी लोकेशा भारती ने सागर मंथन, चंद्र देव के अभिमान का प्रसंग, मां गंगा का अवतरण एवं महर्षि मार्कण्डेय जी की कथा के माध्यम से जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया।
साध्वी ने सागर मंथन का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे समुद्र मंथन में अमृत से पूर्व विष निकला, वैसे ही जीवन में भी आत्मिक उन्नति से पहले संघर्ष, पीड़ा और धैर्य की परीक्षा आती है। भगवान शिव ने लोककल्याण हेतु विषपान कर यह संदेश दिया कि सच्चा शिव तत्व त्याग, संयम और समाज हित में निहित है, न कि स्वार्थ और भोग में। चंद्र देव की श्राप मुक्ति और शरणागति प्रसंग को विस्तार देते हुए साध्वी जी ने चंद्र देव की श्राप मुक्ति की कथा सुनाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब चंद्र देव क्षय रोग के श्राप से ग्रस्त होकर मृत्यु के निकट थे, तब केवल शिव की शरणागति और उनकी आराधना ने ही उन्हें जीवनदान दिया। शिव तत्व दया और करुणा का वह पुंज है जो भक्त के कष्टों का निवारण कर उसे नया जीवन प्रदान करता है।
मां गंगा के अवतरण की कथा में यह स्पष्ट किया गया कि जब चेतना धरती पर उतरती है, तभी जीवन पवित्र बनता है। गंगा केवल जल नहीं, बल्कि शुद्ध विचार, शुद्ध कर्म और शुद्ध जीवन का प्रतीक है। महामृत्युंजय मंत्र: अंतर्मन में चलता ‘प्रभु का नाम’ महर्षि मार्कण्डेय जी की कथा के माध्यम से साध्वी जी ने एक महान सत्य को उजागर किया। उन्होंने कहा कि महामृत्युंजय मंत्र वास्तव में हमारे प्राणों में छिपे उस अविनाशी नाम का प्रतीक है, जो हर क्षण हमारी सांसों के भीतर चल रहा है। असली नाम किसी अक्षरी भाषा में नहीं, बल्कि हमारे भीतर स्पंदित हो रहा है। जब पूर्ण गुरु कृपा करते हैं और हृदय में उस दिव्य नाम को प्रकट करते हैं, तभी वास्तव में भगवान का साक्षात्कार होता है।
इस दौरान भरत सिंह AGM जवाहर कला केन्द्र, राजेश शर्मा ASI GRP अजमेर, प्रेम सिंह प्रिंसिपल टैगोर विद्या आश्रम, अनिल शर्मा ब्राईट फ्यूचर पब्लिक स्कूल, तारा चंद जे डी पैराडाइज, घोटू लाल जे डी पैराडाइज, हनुमान सहाय जे डी पैराडाइज, सुरेश खण्डेलवाल, विश्व हिन्दु परिषद, मुख्य कथा सहयोगी मनोज शिव ट्रेडिंग कंपनी सहित बड़ी संख्या में जन समूह उपस्थित रहा।
