जयपुर, 14 दिसम्बर।दिव्य गुरु आशुतोष महाराज की परम दिव्य अनुकंपा से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा मंदिर श्री रामचन्द्र, हवामहल, बड़ी चौपड़, जयपुर में मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन आत्मजागृति एवं शिष्यत्व के मूल मूल्यों को सुदृढ़ करने हेतु एक प्रेरणादायक आध्यात्मिक समागम के रूप में संपन्न हुआ। जिसमें यह संदेश दिया गया कि एक जागृत शिष्य को निरंतर ध्यान, त्याग, दृढ़ संकल्प, अनुशासन एवं आत्म-संयम जैसे सद्गुणों के साथ शिष्यत्व की बुनियादों से जुड़े रहना आवश्यक है। इस दृष्टि से यह मासिक कार्यक्रम साधकों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध हुआ।
साधवी मेदिनी भारती ने ब्रह्मज्ञान के दुर्लभ और अलौकिक महत्व को सरल एवं प्रभावशाली रूप में स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह आत्मज्ञान आधारित दिव्य विज्ञान प्राचीन शास्त्रों द्वारा प्रमाणित है तथा व्यावहारिक जीवन में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाने में पूर्णतः सक्षम है । कार्यक्रम के दौरान भजन, आंतरिक आत्मावलोकन तथा प्रेरणादायक प्रवचनों की श्रृंखला प्रस्तुत की गई, जिससे साधक पूर्ण गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए धर्मपथ पर एकजुट होकर चलने के लिए प्रेरित हुए। इस अवसर पर साध्वी मेदनी भारती जी ने शिष्य धर्म के सफलता सूत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि गुरु की कृपा सदैव शिष्य की सभी संभावित कष्टों एवं विपत्तियों से रक्षा करती है, बशर्ते शिष्य पूर्ण समर्पण भाव से गुरुचरणों में शरण ले।
ऐसे मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम साधकों के भीतर एकता, सौहार्द, प्रेम एवं दिव्यता के मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ करते हैं तथा समाज को आध्यात्मिक रूप से उन्नत बनाते हैं। निरंतर साधना, समर्पण और अटूट विश्वास से शिष्य आध्यात्मिक उपलब्धियों को प्राप्त कर अंतःचेतना की गहराइयों को जाग्रत करता है, जो अत्यंत शांतिदायक एवं दिव्य शक्ति से परिपूर्ण अनुभव प्रदान करता है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक साधना एवं वैश्विक मंगलकामना के साथ हुआ। तत्पश्चात सभी ने एक परिवार की भावना के साथ दिव्य सामूहिक भंडारे में सहभागिता कर कार्यक्रम को उमंग और प्रसन्नता के साथ संपन्न किया।
