जयपुर, 19 अगस्त। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के संहिता एवं मौलिक सिद्धान्त विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय महर्षि चरक जयंती 2026 समारोह का बुधवार को समापन हुआ। 17 से 19 अगस्त तक आयोजित इस अकादमिक समारोह में महर्षि चरक के आयुर्वेद में योगदान, चरक संहिता के मौलिक सिद्धांतों तथा वर्तमान स्वास्थ्य परिदृश्य में उनकी प्रासंगिकता पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। तीन दिवसीय समारोह में प्रो. वैद्य बनवारी लाल गौड़, संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. पी. हेमन्ता, प्रो. निशा गुप्ता सहित प्रो. असित पांजा, प्रो. शैलजा, डॉ. विद्याधर काशीकर, डॉ. अभिजीत कुंभार, डॉ. प्रवीण कुमार बी, डॉ. अंकित भारद्वाज एवं श्री अनिल शर्मा सहित आयुर्वेद विशेषज्ञों ने सहभागिता की। विशेषज्ञों ने महर्षि चरक के सिद्धांतों की समकालीन प्रासंगिकता के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से आमजन के स्वास्थ्य संरक्षण, रोग-निवारण एवं प्रभावी उपचार के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि महर्षि चरक की वैज्ञानिक एवं तर्कसंगत चिकित्सा दृष्टि आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। शास्त्रीय आयुर्वेद ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण से जोड़कर आयुर्वेद की वैश्विक संभावनाओं को और व्यापक बनाया जा सकता है। युवा शोधार्थियों को इस दिशा में आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है।विभागाध्यक्ष प्रो. निशा गुप्ता ने कहा कि चरक संहिता के सिद्धांत चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, स्वास्थ्य संरक्षण और रोग-निवारण के क्षेत्र में आज भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। चरक जयंती जैसे आयोजन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को आयुर्वेद की समृद्ध ज्ञान परंपरा से जोड़ने और उसके वैज्ञानिक पक्ष को समझने का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं।
