Sunday, June 21, 2026
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आर्यिका अर्हमश्री माताजी के पहला चातुर्मास होगा जयपुर में




जयपुर, 21 जून। मानसरोवर में आयोजित भव्य चातुर्मास उद्घोषणा समारोह में परम पूज्य आर्यिका अर्हमश्री माताजी ने वर्ष 2026 के चातुर्मास की घोषणा करते हुए गोपालपुरा मोड़ स्थित मंगल विहार जैन समाज को यह गौरवपूर्ण अवसर प्रदान किया। मंगल विहार में यह पहला अवसर होगा जब किसी आर्यिका संघ का चातुर्मास संपन्न होगा। साथ ही यह पूज्य अर्हमश्री माताजी का भी राजधानी जयपुर में प्रथम चातुर्मास होगा।

अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि रविवार प्रातः 8 बजे से ही श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हुआ। प्रातः 9:15 बजे गंगवाल परिवार द्वारा ध्वजारोहण के साथ समारोह का शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट जैसी धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा आकर्षक मंगलाचरण नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर पूज्य माताजी की अष्टद्रव्य से गुरु पूजा संपन्न हुई, जिसमें मांग्यावास, वरुण पथ, हीरा पथ, त्रिवेणी नगर, मंगल विहार, जनकपुरी, प्रताप नगर, नागौर एवं दिल्ली जैन समाज के श्रद्धालुओं ने क्रमशः द्रव्य अर्पित कर पुण्य अर्जित किया।

मंच संचालन कर रहे जितेंद्र जैन ‘जीतू’ तथा पंडित प्रद्युम्न जैन द्वारा भजनों, मंत्रोच्चार एवं संगीत के साथ पूजन कार्यक्रम संपन्न करवाया गया। इसके पश्चात चातुर्मास का सौभाग्य प्राप्त करने हेतु वरुण पथ, जनकपुरी, प्रताप नगर, हीरा पथ, मांग्यावास, चित्रकूट कॉलोनी, मधुवन कॉलोनी, नागौर, दिल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों की समाजों के प्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं ने श्रीफल भेंट कर अपनी अनुमोदना प्रस्तुत की।समारोह के समापन अवसर पर अपने मंगल प्रवचन में पूज्य अर्हमश्री माताजी ने वर्ष 2026 के चातुर्मास की घोषणा करते हुए मंगल विहार जैन समाज को यह सौभाग्य प्रदान किया। इस अवसर पर माताजी ने कहा कि यह चातुर्मास केवल मंगल विहार का नहीं, बल्कि संपूर्ण जयपुर जैन समाज का चातुर्मास है। उन्होंने कहा कि धर्म की प्रभावना करना और युवाओं को संस्कारों के मार्ग पर अग्रसर करना ही चातुर्मास का मूल उद्देश्य है। इसलिए जयपुर के सभी क्षेत्रों के श्रद्धालु इसे अपना चातुर्मास मानकर सक्रिय सहभागिता करें।

माताजी ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों की समाजों ने चातुर्मास हेतु विनम्र निवेदन किया था, किंतु चयन किसी एक स्थान का ही किया जा सकता था। मंगल विहार जैन समाज ने पहली बार चातुर्मास आयोजित करने का साहस और संकल्प दिखाया, जिसके फलस्वरूप उन्हें यह पुण्य अवसर प्राप्त हुआ। पंचदिवसीय कार्यक्रम अत्यंत प्रेरणादायी, ज्ञानवर्धक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। उनके दिव्य प्रवचनों, मार्गदर्शन एवं सान्निध्य से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अमूल्य धर्मलाभ प्राप्त किया। आत्मकल्याण, संयम, स्वाध्याय एवं धर्म आराधना के संदेशों ने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया।

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