जयपुर, 20 जून। संयुक्त अभिभावक संघ ने राजस्थान सरकार एवं शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश प्रक्रिया की लॉटरी निकले लगभग 110 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक करीब 1.80 लाख चयनित विद्यार्थियों को नियमित प्रवेश नहीं मिल पाया है। जबकि नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल 2026 से प्रारम्भ हो चुका है और विद्यालयों में पढ़ाई का एक बड़ा हिस्सा पूरा होने की ओर है। संघ ने आरोप लगाते कहा कि आरटीई का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में सरकार और शिक्षा विभाग बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय निजी विद्यालयों के हितों की सुरक्षा करते दिखाई दे रहे हैं। हजारों अभिभावक रोजाना शिक्षा विभाग और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि चयनित बच्चों का भविष्य अनिश्चितता के अंधकार में फंसा हुआ है। यदि कोई निजी विद्यालय आरटीई नियमों का उल्लंघन कर रहा है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन विभाग की निष्क्रियता के कारण गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है।
प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि आरटीई में एडमिशन नहीं होना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद बच्चों के संवैधानिक एवं मौलिक अधिकारों के साथ अन्याय है। शिक्षा विभाग की नीयत पर इसलिए सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि विभाग चयनित विद्यार्थियों को संरक्षण देने के बजाय निजी स्कूलों की सुरक्षा में अधिक रुचि दिखा रहा है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि सरकार को तत्काल विशेष अभियान चलाकर सभी चयनित विद्यार्थियों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाना चाहिए। प्रवेश देने से इनकार करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए तथा अभिभावकों को अनावश्यक दस्तावेजी एवं प्रशासनिक परेशानियों से राहत दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के अभिभावकों के साथ 1 जुलाई 2026 से व्यापक जन आंदोलन प्रारम्भ किया जाएगा। यह आंदोलन सड़क से लेकर सदन तक चलाया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी ली जाएगी।
