जयपुर, 21 जून।अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर द्वारा विश्व प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक जंतर-मंतर परिसर में आयोजित मुख्य योग कार्यक्रम में बारिश की फुहारों के बीच हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक सामूहिक योगाभ्यास किया। इस वर्ष की थीम Yoga for Healthy Ageing के अनुरूप आयोजित कार्यक्रम में आमजन, शिक्षाविदों, चिकित्सा विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने योग को स्वस्थ, संतुलित और निरोगी जीवन का आधार बताया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा, हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नंदकिशोर पांडे, विद्या भारती राजस्थान के प्रांत सचिव डॉ. मेघेंद्र शर्मा, ब्रह्माकुमारीज की वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षक बी.के. सुषमा दीदी, संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान कॉमन योग प्रोटोकॉल का सामूहिक अभ्यास कराया गया तथा योग एवं आयुर्वेद आधारित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि योग भारत की अमूल्य ज्ञान परंपरा है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक स्तर पर संतुलित बनाती है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ वृद्धावस्था, निवारक स्वास्थ्य देखभाल तथा जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने में योग और आयुर्वेद की भूमिका आज विश्व स्तर पर प्रमाणित हो चुकी है तथा दोनों मिलकर ‘निरोगी भारत’ के निर्माण का सशक्त आधार बन सकते हैं।
हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नंदकिशोर पांडे ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की वह धरोहर है जिसने सम्पूर्ण विश्व को स्वास्थ्य और आत्मानुशासन का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि योग के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक स्वरूप को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
डॉ. मेघेंद्र शर्मा ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो व्यक्ति के चरित्र, स्वास्थ्य और जीवन मूल्यों को सशक्त बनाता है। वहीं बी.के. सुषमा दीदी ने कहा कि योग एवं राजयोग व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक जीवन दृष्टि प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में अध्ययनरत 18 देशों के अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की सहभागिता रही। नेपाल, थाईलैंड, बांग्लादेश, नीदरलैंड, ब्राज़ील, अमेरिका, श्रीलंका, केन्या, तंजानिया, घाना, नाइजीरिया सहित विभिन्न देशों से आए विद्यार्थियों ने योगाभ्यास में भाग लेकर भारतीय योग एवं आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकार्यता को प्रदर्शित किया। ऐतिहासिक जंतर-मंतर से इन विद्यार्थियों ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के साथ विश्व समुदाय को स्वास्थ्य, शांति एवं समग्र कल्याण का संदेश दिया।
संस्थान के योग एवं स्वस्थवृत्त विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. दुर्गावती देवी ने बताया कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान द्वारा आमजन एवं रोगियों के लिए नियमित रूप से निःशुल्क योग कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इस अवसर पर संस्थान में आयुर्वेद शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।
