जयपुर, 18 मई | राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित और न्यायोचित मांगों पर अपनाए जा रहे उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने अब पूरी तरह से आर-पार की जंग का बिगुल फूंक दिया है। इसी सिलसिले में आज राजधानी जयपुर के गवर्नमेंट प्रेस कार्यालय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन प्रदेश स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें सरकार के कर्मचारी विरोधी रवैये के खिलाफ और कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की गई।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया की इस बैठक में विभिन्न संवर्गों की लंबित मांगों, राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) को बीमा कंपनी को नहीं देकर पूर्व की भांति समस्त अनुमोदित अस्पतालों में ओपीडी एवं आईपीडी तथा दवाओ की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सरेंडर लीव (समर्पित अवकाश) का भुगतान तुरंत जारी करने, बजट घोषणा के अनुरूप पदोन्नति में अनुभव एवं सेवा अवधि में 2 वर्ष की छूट, संविदाकर्मियों एवं ठेका कर्मचारियों के अविलंब नियमितीकरण सहित लंबित 25 सूत्री मांगपत्र जैसे संवेदनशील वित्तीय लाभों को लेकर एवं चिकित्सा मंत्री द्वारा आरजीएचएस को बीमा कंपनी को देने के बयान पर कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। बैठक में मौजूद समस्त पदाधिकारियों ने एक सुर में सरकार को चेतावनी दी कि कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूट चुका है और अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा।
बैठक को प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़, कुलदीप यादव, विनोद सिद्धा, शेर सिंह यादव, देवेंद्र सिंह नरूका, राजेन्द्र शर्मा, अजयवीर सिंह, ओमप्रकाश चौधरी, सुरेश चंद शर्मा, प्रकाश यादव, विजय सिंह, चंद्रभान चौधरी, पवन शर्मा, भंवर सिंह हाडा, शंभू सिंह हाडा, गोपाल सिंह तंवर, खेमराज सिंह सोलंकी, तेज प्रकाश चतुर्वेदी, कान्ति कुमार शर्मा, सर्वेश्वर शर्मा, रणजीत मीणा, सुभाष यादव, शिवकुमार, प्रहलाद राय, नाथू सिंह गुर्जर, बहादुर सिंह, महेश कुमार, गोपाल शर्मा, ज्ञानचंद जांगिड़, प्रताप सिंह खुडी, लक्ष्मी नारायण मीणा, शशि शर्मा सहित प्रदेशभर से आए सभी जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ कर्मचारी नेताओं ने संबोधित करते हुए संगठन की एकजुटता का अहसास कराया।
