Sunday, September 13, 2026
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आयुर्वेद संस्थान में पांडुलिपि संरक्षण कार्यशाला का समापन



जयपुर, 07 मई | आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान मानद विश्वविद्यालय, जयपुर के आयुर्वेद पाण्डुलिपि विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित पांडुलिपियों के संरक्षण एवं परिरक्षण विषय पर चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का गुरुवार को सफल समापन हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षकों, पांडुलिपि विशेषज्ञों एवं संरक्षण कर्ताओं ने भाग लेकर भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहरों के संरक्षण, रिस्टोरेशन, दस्तावेजीकरण एवं डिजिटलीकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रतिभागियों को ताड़पत्र, भोजपत्र, हस्तनिर्मित कागज़, धातु एवं चित्रित पांडुलिपियों की संरचना, उनके पुराना होकर टूट-फूट एवं गलने-सड़ने के कारण, सतही सफाई, रिपेयरिंग, रिस्टोरेशन, इंक रिस्टोरेशन तकनीक, तापमान एवं आर्द्रता नियंत्रण, सुरक्षित भंडारण तथा डिजिटलीकरण की आधुनिक विधियों का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला के दौरान लगभग 250 वर्ष प्राचीन शुश्रुत संहिता पांडुलिपि विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यह पांडुलिपि प्राचीन ओड़िया लिपि एवं संस्कृत-ओड़िया मिश्रित भाषा में लिखित पाई गई, जिसके संरक्षण एवं परीक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया का विशेषज्ञों द्वारा लाइव प्रदर्शन किया गया। प्रोफेसर संजीव शर्मा ने कहा कि भारतीय पांडुलिपियाँ हमारी प्राचीन वैज्ञानिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण केवल इतिहास को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को भारतीय ज्ञान की मूल जड़ों से जोड़ने का कार्य है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान इस दिशा में निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रहा है। आयुर्वेद पाण्डुलिपि-विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला के नोडल अधिकारी प्रोफसर असित कुमार पाञ्जा ने कहा कि यह कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की विलुप्त होती ज्ञान धरोहरों को संरक्षित करने का राष्ट्रीय अभियान है। चार दिनों तक प्रतिभागियों ने पांडुलिपियों के संरक्षण की पारंपरिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों का गहन प्रैक्टिकल प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में पांडुलिपियों की रिपेयरिंग, डिजास्टर मैनेजमेंट, सूचीकरण, डिजिटलीकरण एवं सुरक्षित संरक्षण से संबंधित सभी प्रमुख पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।इस चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में ज्ञानभारतम्, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के विशेषज्ञ पूरनचन्द्र एवं अर्चना गहलोत के साथ राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. सोम शर्मा ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात सहित देशभर के कई राज्यों से आए प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।

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