जयपुर, 5 जुलाई। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान द्वारा 3–4 जुलाई 2026 को करिकुलम रिफॉर्म फॉर इंटरडिसिप्लिनरी डिपार्टमेंट्स विषय पर दो दिवसीय वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप का उद्देश्य संस्थान में संचालित छह नए इंटरडिसिप्लिनरी M.Sc. प्रोग्राम्स के करिकुलम को कॉम्पिटेंसी-बेस्ड एवं आउटकम-ओरिएंटेड एजुकेशन के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाना है ।
कार्यक्रम में प्रो. पी. हेमंता कुमार ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आयुर्वेद शिक्षा में इंटरडिसिप्लिनरी एजुकेशन, इनोवेशन तथा रिसर्च-ओरिएंटेड पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप करिकुलम विकसित कर विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करना संस्थान की प्राथमिकता है। कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. अनीता शर्मा, प्रो. मीता कोटेचा, प्रो. सर्वेश कुमार अग्रवाल, प्रो. कमलेश शर्मा, प्रो. कनिका वर्मा, प्रो. श्रीनाथ वैद्य, डॉ. विनोद कुमार एम.वी., डॉ. गौरव फुल, प्रो. अंचित गुगनानी, डॉ. परमवीर शेखावत, प्रो. जेराल्डीन जैन तथा डॉ. बिष्णु चौधरी सहित अन्य विशेषज्ञों ने सक्रिय रूप से अपने सुझाव एवं अनुभव साझा किए।
दो दिवसीय वर्कशॉप के दौरान छह इंटरडिसिप्लिनरी डिपार्टमेंट्स—आयुर्वेद डाइट एंड न्यूट्रिशन, आयुर्वेद मैन्युस्क्रिप्टोलॉजी, आयुर-योग प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, मर्मोलॉजी एंड स्पोर्ट्स मेडिसिन, सौंदर्य आयुर्वेद तथा वृक्षायुर्वेद—के लिए समानांतर टेक्निकल सेशंस आयोजित किए गए। इन सेशंस में सभी विभागाध्यक्षों, फैकल्टी मेंबर्स एवं सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने सिलेबस रिवीजन पर विस्तृत चर्चा की। विचार-विमर्श के दौरान कॉम्पिटेंसी-बेस्ड लर्निंग, थ्योरी, प्रैक्टिकल एवं एक्सपीरिएंशियल लर्निंग के संतुलित समावेश, रिसर्च मेथडोलॉजी तथा विषय-विशेष स्किल डेवलपमेंट को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। डीन, इंटरडिसिप्लिनरी स्टडीज़ प्रो. सर्वेश कुमार अग्रवाल ने वर्कशॉप की प्रमुख अनुशंसाओं का समग्र प्रस्तुतिकरण किया।
