जयपुर, 15 नवम्बर | देव दिवाली कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार है जो यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी मे मनाया जाता है। यह विश्व के सबसे प्राचीन शहर काशी की संस्कृति एवं परम्परा है। यह पर्व हर साल दीपावली के पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। साथ ही देव दिवाली की कथा त्रिपुरासुर के वध से जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था। इस कारण से कार्तिक पूर्णिमा पर देवताओं ने खुश होकर दिवाली मनाई थी। तभी से कार्तिक पूर्णिमा को ‘देव दिवाली’ कहा जाने लगा क्योंकि सभी देवता पृथ्वी पर आकर दिवाली मनाने आए थे।
इस उपलक्ष्य में लोग दीपदान करते हैं | कार्तिक पूर्णिमा को स्नान और दान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। देव दिवाली के दिन काशी यानी वाराणसी में एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। इस दिन काशी के सारे घाट रोशनी से जगमगा उठते हैं। हजारों लोग घाटों पर दीये जलाते हैं और गंगा नदी में दीपदान करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
