जयपुर 13, अप्रैल | अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ ने रेजिडेंट डॉक्टरों के निलंबन को दमनात्मक कार्यवाही बताते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री से उनकी बहाली की मांग की है | संघ रेजिडेंट डॉक्टरों राज्य की चिकित्सा सेवाओं की रीढ़ की हड्डी की भांति हैं।सभी मेडिकल कॉलेजों में इन्हीं के समर्पित कार्य की वजह से चिकित्सा सेवाएं सुचारू और बेहतरीन तरीके सेचलती हैं।किन्तु दुःख विषय है कि इन युवा चि कित्सकों की पीठ थपथपाना तो दूर किसी भी अप्रिय घटना काठीकरा हर बार इनके सिर फोड़ दिया जाता है।यदि चिकित्सालय में कोई उत्कृष्ट, उल्लेखनीय कार्य हो तो उसकासारा श्रेय वहाँ के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिया जाता है, किंतु यदि कोई अप्रिय प्रकरण व्यवस्था की कमी याअन्य किसी कारण हो जाए तो उसमें रेजिडेंट चिकित्सकों के खिलाफ आनन फानन में कार्यवाही कर उनकेभविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है और घटना के लिए उत्तरदायी व्यवस्था को बचा लिया जाता है।हाल ही में जयपुर के कांवटिया अस्पताल परिसर में हुए एक महिला के प्रसव के अपरिहार्य मामले में भी इसेदोहराया गया है। इस खेदजनक घटना का ठीकरा सदैव की भांति रेजिडेंट चिकित्सकों के सिर फोड़ उन्हें निलंबितकर समस्या की असली जड़ पर पर्दा डाल कर खानापूर्ति कर ली गई है, जो कि अन्यायपूर्ण है और रेजिडेंटचिकित्सक जो कि प्रशिक्षु चिकित्सक हैं, उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।


अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिस्दा ) के अध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री से निवेदन करते कहा कि रेजिडेंट चिकित्सकों पर इस प्रकार की दमनात्मककार्यवाही का संघ विरोध करता है साथ ही निवेदन करता है कि इस पर तत्काल संज्ञान लेकर निर्दोष रेजिडेंटचिकित्सकों के विरुद्ध की गयी कार्यवाही को वापस करवा उन्हें राहत प्रदान करें।श्रीमान जी साथ ही निवेदन है कि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए इसके कारणों की तहतक जाकर मूल व्यवस्था में सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी जारी किए जाएं ता कि राज्य के मेडिकलकॉलेज से जुड़े चिकत्सालयों में आमजन को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ 24 x 7 सर्व सुलभ हो सकें।महोदय जी , अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (अरिस्दा ) को पूर्ण विश्वास है कि आप शीघ्र ही रेजिडेंटचिकित्सकों की न्यायोचित मांगों पर संज्ञान लेकर उन्हें राहत प्रदान करेंगे।
