जयपुर, 21 फरवरी | रोजाना हमें किसी मांग को लेकर कोई भी संगठन, पार्टी, समाज , कर्मचारी वर्ग आये दिन धरना प्रदर्शन या शहर, प्रदेश, देश बंद का ऐलान करते हुये नज़र आयेगे | इन कई आंदोलनों के दौरान यह देखने को मिलता है कि कही पर रेल की पटरिया उखाड़ दी जाती है कही पर रास्ता रोका जाता है | इस दौरान कई जगह तोड़फोड़ भी की जाती है | जो लोग उस जगह रहते है वह चुपचाप अपने होने वाले नुकसान को मूकदर्शक बन देखने के आलावा कुछ नहीं कर सकते है | हो सकता है कि आप सरकार किसी नीति से सहमत नहीं हो और उसके खिलाफ आवाज़ उठाना आपका हक़ हो सकता है लेकिन इसके लिए दुसरो को होने वाले नुकसान का ध्यान भी हम सब को रखना पड़ेगा |

इसके लिए देश की संसद कोई ठोस निर्णय ले या सर्वोच्च न्यायालय ऐसी होने वाली घटनाओ को रोकने के संज्ञान ले| जो भी राजनीतिक,सामाजिक दल संगठन, या व्यक्ति विशेष किसी भी मांग को लेकर धरना,प्रदर्शन या रैली निकालता है तो उसे ये बॉन्ड भरना पड़ेगा की आपका हक है कि आप लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग या अधिकार के लिए जो भी धरना या प्रदर्शन कर रहे है वो एक मर्यादा में हो और अगर मर्यादा टूट ती है तो उस दौरान हुए जान माल या राष्ट्रीय संपत्ति के नुकसान की भरपाई उस आयोजन दल संगठन या व्यक्ति विशेष की जिम्मेदारी होगी ना की आम जनता के टैक्स द्वारा जमा हुई देश की पूंजी से होगी | सोचने में अवश्य अजीब सा है परंतु जिस तरह से आंदोलन करने की संख्या में बढ़ोतरी, हिंसक तरीके और मीडिया में नाम पाने का साधन बना लिया गया है उस पर कुछ तो लगाम लगाई जाए | इसके लिए सरकार और सर्वोच्च न्यायालय को ऐसी पहल करनी चाहिए लोग अपने हक़ के लिए प्रदर्शन करे लेकिन किसी की निजी अथवा सरकारी सम्पति को नुकसान नहीं पहुचाये |
