Wednesday, January 28, 2026
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राज्य सरकार ने जारी किया अनिवार्य सेवानिवृति का आदेश कर्मचारियो में शुरू हुआ विरोध 


जयपुर 24 मई | राजस्थान सरकार ने मुख्य सचिव के माध्यम से अनिवार्य सेवानिवृति का आदेश निकाला है जिसमे कहा गया कि राजस्थान सिविल सेवाएं ( पेंशन ) नियम 1996 के नियम 53 ( 1 ) के अनुसार ऐसे सरकारी अधिकारी / कर्मचारी जिन्होंने 15 वर्ष की सेवा अथवा 50 वर्ष की आयु जो भी पहले पूरी कर ली है एवं अपनी अकर्मण्यता, सन्देहापद, सत्यनिष्ठा, अक्षमता एवं अकार्यकुशलता अथवा असंतोषजनक कार्य निष्पादन के कारण जनहितार्थ आवश्यक उपयोगिता खो चूका है ऐसे अधिकारी / कर्मचारी की स्क्रीनिग कर तीन माह के नोटिस अथवा उसके स्थान पर तीन माह के वेतन व भत्ते के भुगतान के साथ तुरंत प्रभाव से राज्य सेवा से सेवानिवृति किया जा सकेगा | मुख्यसचिव की और से  सभी प्रशासनिक विभागों और विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया है | 
   

कर्मचारियों में शुरू हुआ इसका विरोध 

 अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने इसका कड़ा विरोध करते हुए व्यक्तव्य जारी किया कि कर्मचारियों की अकर्मण्यता की परिभाषा क्या है । सरकार कर्मचारियों पर दिन प्रतिदिन नई-नई पाबंदियां लग रही है परंतु उनके कल्याण के लिए कुछ नहीं कर रही है। वर्षों से विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों एवं अन्य मांगों को पूरा करने के लिए की बजाए सरकार  ईमानदारी के साथ अपना कर्तव्य पालन कर रहे कर्मचारियों को भयभीत कर रही है । इस प्रकार के आदेशों से कर्मचारियों में आतंक व्याप्त हो गया है जिससे उनकी कार्य क्षमता भी प्रभावित होगी। इस प्रकार की आदेश अधिकारियों को मनमानी करने के लिए बढ़ावा देंगे और कर्मचारियों में चापलूसी की भावना बढ़ेगी। सरकार के पास विभिन्न संवर्गों के मांग पत्र पड़े हैं, सरकार उन पर एक निर्धारित समय में कार्रवाई के लिए कैलेंडर जारी करे ताकि कर्मचारी और जोश के साथ सरकार की नीतियों का क्रियान्वयन कर जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान कर सके। वही कुलदीप यादव ने कहा कि सरकार औचक निरीक्षण के नाम पर निलंबित करना, मोबाइल ऐप से हाजिरी करवाना तथा लोकेशन ऑन रखवाना, जींस टी शर्ट को मुद्दा बनाना और अब 15 वर्ष से अधिक सेवा वाले अथवा 50 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों की इरादतन स्क्रीनिंग करना और उनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान करने का हाल ही का आदेश इसका ज्वलंत उदाहरण है।

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