जयपुर, 29 फरवरी। राजस्थान की भाजपा सरकार, मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री पहले ईआरसीपी जल समझौते की बात कर प्रदेश की जनता को गुमराह कर रहे थे और अब 17 फरवरी, 2024 को राजस्थान के शेखावाटी में यमुना के पानी को लाने हेतु हरियाणा की सरकार से कोई एमओयू साइन किया जिसको लेकर आभार यात्रायें कर रहे हैं तथा भागीरथ मुख्यमंत्री आये हैं, इस प्रकार के होर्डिंग्स लगाकर भाजपा द्वारा प्रचार किया जा रहा है। यमुना जल समझौता 1994 में किया गया था तथा अपर यमुना जल बोर्ड में पांच राज्य आते हैं, हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान। इसमें यह फैसला हुआ था कि शेखावाटी को 1917 क्यूसेक पानी मिलेगा। एक समझौता 2001-2002 में भी हुआ जिसमें हरियाणा से यह तय हुआ कि किस स्थान से पानी मिलेगा। उस समय हरियाणा का दावा 13 हजार क्यूसेक पर था, उसके अतिरिक्त पानी लेने हेतु आधारभूत ढाँचा तैयार किया जाना था, किन्तु हरियाणा ने उसकी एनओसी राजस्थान को नहीं दी। हरियाणा ने बाद में अपनी डिमाण्ड बढ़ाकर 18 हजार कर ली और अभी जो कथित समझौता होना बताया जा रहा है उसमें राजस्थान की भाजपा सरकार ने हरियाणा के समक्ष आत्म समर्पण कर दिया तथा समझौते पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कह रहे हैं कि 24 हजार क्यूसेक पानी पहले हरियाणा लेगा उसके पश्चात् बरसात के दिनों में 15-20 दिन अगर कोई अतिरिक्त पानी हुआ तो राजस्थान को देंगे, किन्तु उस अतिरिक्त पानी में से भी 25 प्रतिशत पानी पहले हरियाणा लेगा। उक्त विचार कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।


उन्होंने कहा कि राजस्थान की सरकार ने आज तक देश व प्रदेश की जनता अथवा मीडिया के सामने ईआरसीपी के एमओयू की शर्तों वाली प्रति प्रस्तुत नहीं की, ना विधानसभा में, ना जनप्रतिनिधियों को जानकारी प्रदान की गई है। अब हरियाणा सरकार राजस्थान की भाजपा सरकार ने क्या समझौता किया है, कितने पानी का समझौता किया है, उसका खुलासा भी राजस्थान की भाजपा सरकार ने नहीं किया। जबकि वास्तविकता यह है कि पानी का समझौता तो वर्तमान राजस्थान सरकार को करने का अधिकार ही नहीं है, क्योंकि किसे कितना पानी मिलेगा, यह समझौता पूर्व में हो चुका है, वर्तमान में तो केवल पानी लाने हेतु पाईप लाईन बिछाने का एमओयू ही होना था। उन्होंने कहा कि केवल आधारभूत ढांचे के निर्माण की इजाजत देने के नाम पर हरियाणा सरकार ने 13 हजार से बढ़ाकर 24 हजार क्यूसेक पानी लेने हेतु राजस्थान की भाजपा सरकार से तय कर लिया, जिसमें यह भी तय कर लिया कि 15-20 दिन की बरसात के पश्चात् अतिरिक्त पानी में से 25 प्रतिशत हरियाणा के लेने के बाद कोई पानी बचा तो ही राजस्थान को दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा विधानसभा में दिये गये वक्तव्य के अनुसार राजस्थान की भाजपा सरकार ने प्रदेश की जनता के हितों से खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में मुख्यमंत्री केवल भ्रमण करने का कार्य कर रहे हैं तथा आरएसएस के मुख्य एजेंडे के अनुसरण में प्रदेश की जनता को भ्रमित करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार का समझौता कथित रूप से किया गया है उसमें राजस्थान को एक लीटर पानी भी मिलना संभव दिखाई नहीं दे रहा है, किन्तु राजस्थान के भ्रमणशील मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, राजीविका के कार्यकर्ताओं व सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश देकर खुद का स्वागत करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भाजपा सरकार ने प्रदेशवासियों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि पहले ईआरसीपी के नाम पर धोखा किया गया, जहॉं इस योजना के तहत् 3510 एमसीएम पानी मिलना था, किन्तु 2400 एमसीएम पानी लेने का समझौता राजस्थान की जनता के हितों का सौदा भाजपा सरकार ने किया। उन्होंने कहा कि आज राजस्थान की भाजपा सरकार ने हरियाणा की सरकार के सामने घुटने टेेक दिये, केवल इसलिये कि पाईप लाईन बिछाना की अनुमति मिलेगी अथवा नहीं। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भाजपा की डबल इंजन की सरकार के प्रदेशवासियों के हितों के साथ कुठाराघात किया है तथा जनता को धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार केवल और केवल प्रदेशवासियों को भ्रमित कर आगामी लोकसभा चुनावों में वोटों का फायदा लेना चाहती है जिसमें भाजपा कामयाब नहीं होगी।
